साहित्य

मानव

डा राजेश तिवारी

मानव बन के दिखा दीजिए।

दानव थोड़ी दया कीजिए।।

 

तन ये नर का मिला है तुम्हें ,

वैसा कुछ तो करम कीजिए।। 1

 

ये हैं दुर्लभ बहुत भटका तू ,

बुद्धि थोड़ी लगा लीजिए।। 2

 

स्वर्ग और मोक्ष का द्वार ये ,

अच्छा सा कुछ जतन कीजिए।। 3

 

तन से दिखते मनुष्य आप तो ,

कुछ मनुजता दिखा दीजिए।। 4

 

मक्खन सा मन बने आपका,

काम ऐसा कृपा कीजिए।। 5

 

डा राजेश तिवारी मक्खन

झांसी उ प्र

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