
सीं वादियों की कहानी लिखेंगे
गुलों की महक जाफ़रानी लिखेंगे।
जहाँ हर घड़ी झूमती हैं बहारें
ग़ज़ल में उन्ही की रवानी लिखेंगे।
खुला आसमां है सुहाना सफ़र है
इसी दौर की अब निशानी लिखेंगे।
मिलेगा नहीं ये नशीला समां फिर
शजर के दिलों पर जवानी लिखेंगे।
यहाँ डालियाँ हैं घनेरी जियादा
ढ़ली धूप को फिर सुहानी लिखेंगे।
रहें ना रहें हम’ ख़ुदाई रहेगी
गुजारी हुई जिंदगानी लिखेंगे।
मंजुला शरण
राँची, झारखण्ड़।



