साहित्य

शीर्राेषक देश

संगीता श्री

लहराये जहां तिरंगा ,

जिस देश मे पावन गंगा,

जिस देश की मिट्टी कनक है,

वो है मेरा देश हिन्दोस्ता।

वीरों की अनगिनत गाथाएं

बलिदान की स्वर्ण कथाएं,

अवतार जन्मती माएं,

हम सदा उन्हें शीश झुकाएं।

 

है धर्म सनातन अपना,

हम देखें नित नव सपना,

हो स्वर्ग सी धरती अपनी

,करे कर्म से सच हर सपना।

 

चाहत बस इतनी रहेगी,

सन्तान हम भारत मां की,

कोई कर्म ऐसा कर जाएं,

शान भारत की हम बढ़ाएं।

 

कोई देश न ऐसा दूजा,

जहां हो हर धर्म की पूजा,

मिलजुल.रहें भारतवासी,

नहो भेदभाव हो जरा सी।

 

संगीता श्री वास्तवा, वाराणसी

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