साहित्य

यमराज मित्र 

कुंवर आनन्द श्रीवास्तव

उत्तम सद्आचारण है, मिले झुकाकर शीश।

सहज हृदय मन के सरल, दें सबको आशीष।

दें सबको आशीष, सदा प्रोत्साहित करते।

मन में भरकर जोश, सदा उत्साहित करते।

कहयं कुंवर आनन्द, मोह माया न मन में।

ईश्वर रखें सदा स्वस्थ, उनको जीवन में।

 

गोंडा में आवास है, उनका नाम सुधीर।

दारुण दुख को झेलकर, रखते मन में धीर।

रखते मन में धीर, मिले हर पल मुस्काते।

सदा प्रेम से मिलते, सबको आते जाते।

कहयं कुंवर आनन्द, प्रभु इतना कर देना।

रखना इनको स्वस्थ, और दुगना सुख देना।

 

यमराज के मित्र हैं, होती बात विशेष।

गुणी, सुखी, हंसमुख सदा देते हैं सन्देश।

देते हैं सन्देश, कलुषता पीछे रखो।

जब-तक जीवन रहे, मनुष्यता आगे रखो।

कहयं कुंवर आनन्द, धैर्य इनका है बड़ा विचित्र।

जीवन में अनमोल हैं, यमराज के मित्र।

 

कुंवर आनन्द श्रीवास्तव

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