साहित्य

नवसंवत्सर

डाॅ सुमन मेहरोत्रा

नवसंवत्सर का शुभ प्रभात, लेकर आया नव प्रकाश,
मंगल गान गूँजे धरा पर, हर ले जीवन का सब त्रास।
माँ शक्ति की कृपा बरसे, पूर्ण हों मन के अरमान,
सुख-समृद्धि से भर उठे, हर जन-जीवन का आँगन-प्राण।।

चैत शुक्ल की पावन बेला, नवयुग का संदेश लिए,
प्रेम, शांति, सद्भावनाओं के मधुर सुमन विशेष लिए।
मिटें भेद-भाव के तम सब, जागे नव उत्साह अपार,
एकता के दीप जलाकर, बढ़े देश का मान-संभार।।

नववर्ष की वंदन बेला, हरि नाम का हो उच्चार,
दीप जले हर घर-आँगन में, खुशियों की हो भरमार।
राम नवमी की पावन छाया, गूँजे मंगल गान अनूप,
अवध धाम-सा हर हृदय बने, प्रेम भरे हों हर स्वरूप।।

ऋतु नव, भाव नव, नव आशा का यह अनुपम उपहार,
जीवन पथ पर बढ़ते जाएँ, लेकर नव विश्वास अपार।
नवसंवत्सर का यह संदेश—सत्कर्मों का हो विस्तार,
मानवता के दीप जलें, जग में फैले उजियार।।

डाॅ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर, बिहार

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also
Close
Back to top button
error: Content is protected !!