
चलो आज मैं आपको अपनी कहानी सुनाऊं,
कैसा हूं मैं ये तुम्हें बताउँ!!
गुस्सा भी बखूबी करता हूं,
पर ख्याल भी बहुत रखता हूं!!
अच्छों के साथ अच्छा और बुरों के साथ भी,
अच्छा ही बन जाता हूं मैं !
समझदारों का तो पता नहीं पर,
नेक दिल वाले इंसानों की गिनती में,
जरूर आता हूं मैं !
चालाकी का पता नहीं पर,
अच्छे बुरे का भेद पहचान जाता हूं!!
करे कोई बुरा गर तो,
उसे कोसता नहीं पर हां झट से,
अपनी जिंदगी से अलग कर देता हूं…!!
स्वरचित,
मौलिक,
अभिव्यक्ति—
✍🏼पंकज एस पाण्डेय, शिकोहाबाद!!!




