
दीप खुशियों के जगमगाए हैं।
आप जब भी करीब आए हैं।।
आपको भूलना है नामुमकिन,
आपको दिल में हम बसाए हैं।
अश्क आँखों से बह चले पैहम,
आप जब-जब भी याद आए हैं।
आज तक मैं समझ नहीं पाई
आप अपने हैं या पराए हैं।
लोग सुख में भी हंँस नहीं पाते,
और हम दुख में मुस्कुराए हैं।
तेरी चाहत में बेवफ़ा हमने,
मुस्त़क़िल ग़म ही ग़म उठाए हैं।
ये मेरा हौसला है ए गीता
दीप तूफ़ा में भी जलाए हैं।
डॉ गीता पांडेय अपराजिता
सलोन रायबरेली उत्तर प्रदेश




