
चलते- चलते रहो किनारा जरूर मिल जाएगा।
अंधेरों से लड़ते रहो कि प्रकाश जरूर खिल जाएगा।।
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करते रहो अच्छाई कि यह दिलों पर छाप छोड़ती है।
धैर्य त्याग तपस्या जरूर दुनिया का रुख मोड़ती हैं।।
ठानलो मंजिल पे जाने को रास्ता जरूर मिल जाएगा।
चलते -चलते रहो किनारा जरूर मिल जाएगा।।
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हर किसीके हक में दुआ पढ़ो दुआ वापिस मिलेगी।
मत रखो भावनाएं शून्य तेरी तकदीर जरूर फिरेगी।।
मत थक कर रुको राह में कि तेरा वक्त फिर जाएगा।
चलते -चलते रहो किनारा जरूर मिल जाएगा।।
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प्रगति लिए दृष्टिकोण का बदलाव बहुत जरूरी है।
हौंसलों का भी रख – रखाव उतना ही जरूरी है।।
तेरे उत्साह के सामने राह का हर पत्थर हिल जाएगा।
चलते – चलते रहो किनारा जरूर मिल जाएगा।।
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कुछ ऐसा कर के जाना कि वक्त भी मिटा न सके।
शख्सियत में लाना जादू यादें दिल से कोई हटा न सके।।
करके देखो जरा सफलता का शोर चहुंओर घिर जाएगा।
चलते – चलते रहो किनारा जरूर मिल जाएगा।।
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रचयिता।।एस के कपूर”श्री हंस”
बरेली।।
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