साहित्य

रचना शीर्षक

कपूर श्री हंस

चलते- चलते रहो किनारा जरूर मिल जाएगा।

अंधेरों से लड़ते रहो कि प्रकाश जरूर खिल जाएगा।।

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करते रहो अच्छाई कि यह दिलों पर छाप छोड़ती है।

धैर्य त्याग तपस्या जरूर दुनिया का रुख मोड़ती हैं।।

ठानलो मंजिल पे जाने को रास्ता जरूर मिल जाएगा।

चलते -चलते रहो किनारा जरूर मिल जाएगा।।

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हर किसीके हक में दुआ पढ़ो दुआ वापिस मिलेगी।

मत रखो भावनाएं शून्य तेरी तकदीर जरूर फिरेगी।।

मत थक कर रुको राह में कि तेरा वक्त फिर जाएगा।

चलते -चलते रहो किनारा जरूर मिल जाएगा।।

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प्रगति लिए दृष्टिकोण का बदलाव बहुत जरूरी है।

हौंसलों का भी रख – रखाव उतना ही जरूरी है।।

तेरे उत्साह के सामने राह का हर पत्थर हिल जाएगा।

चलते – चलते रहो किनारा जरूर मिल जाएगा।।

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कुछ ऐसा कर के जाना कि वक्त भी मिटा न सके।

शख्सियत में लाना जादू यादें दिल से कोई हटा न सके।।

करके देखो जरा सफलता का शोर चहुंओर घिर जाएगा।

चलते – चलते रहो किनारा जरूर मिल जाएगा।।

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रचयिता।।एस के कपूर”श्री हंस”

बरेली।।

©. @. skkapoor

सर्वाधिकार सुरक्षित

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