साहित्य

तेरा झुक कर चलना ही बताता है कि आसमाँ तू है 

डॉ रामशंकर चंचल 

बड़ा वह नहीं होता जो दिखता है काश दुनिया के सभी लोग इस सत्य को स्वीकार करते, जो बड़ा होता है मस्त और प्रसन्न हो जीता है अपनी फ़क़ीरी मैं उसे पता है वह क्या है और जो नही होता हैं वह अक्सर दिखता है,,

बड़ा वह होता हैं जो झुक कर चलता हैं ऐसी सैकड़ों बात है किसी व्यक्ति को पहचाने के लिए यह सत्य अक्सर कुछ जानते भी है पर

स्वीकार करते हुए उनका अहम संबोधन आ जाता है और यह अहम

उन्हें आता है जो बड़ा समझ बैठा था खुद को

इससे भी बड़ा सत्य यह है कि न कोई बड़ा होता न कोई छोटा होता

सभी मानव मात्र ईश्वर की संतान है और दुनिया वो चला रहा है सैकड़ों उदाहरण देखे मैने जीवन में किस तरह बड़ा व्यक्ति देखते देखते छोटा और छोटा व्यक्ति बड़ा बन जाता है

इसलिए जिंदगी को सहज सरल व्यकित्व लिए मानव मात्र पशु पक्षी सभी प्रणियों से प्यार करते हुए जीना चाहिए और यह आपको सुख सुकून भी देखा और आपका चेहरा भी सदा निर्विकार सहज सरल बना रहेगा, सहजता सरलता और अपनापन दिखाने की कभी आवश्यकता नहीं होती हैं आप का चेहरा सब कुछ बता देता है आप किस तरह के इंसान है फिर

बेहतर है जिंदगी को मानव मात्र से प्यार करते हुए अहम से कोसों दूर

सभी का आदर और सम्मान करते हुए जीना चाहिए

सम्मान चाहते हैं तो सम्मान देना सीखे तालियां दोनों हाथों से बजती हैं तो ज्यादा सार्थक होती हैं और सदा ही जीवंत रहती हैं

 

खैर साहब अपनी इस बात से पुनः अंत करना चाहता हूं कि

तेरा झुक कर चलना ही

बताया है कि आसमाँ तू है

झुक चले, विन्रम रहे और सभी को प्यार करते आदर करते हुए सम्मान दे

ताकि जिंदगी में अच्छा महसूस खुद करेंगे और सुकून भी

 

 

डॉ रामशंकर चंचल

झाबुआ मध्य प्रदेश

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