
मन की गलियों में जब,
तेरी आहट आती है,
पंखुरी सी पलकों पर,
एक याद खिल जाती है।
तू हवाओं में घुला,
कोई प्यारा सा गीत है,
मेरी धड़कन की लय में,
तेरा ही संगीत है।
नयनों के दर्पण में,
तेरा अक़्स सँवारा है,
सांसों की सरगम में,
नाम तेरा ही प्यारा है।
मन का कोना-कोना,
अब तेरे रंग में रंगा है,
भीतर जो सूना था,
वो अब प्रेम की गंगा है।
मुस्कान की आभा से,
ये मन महक सा जाता है,
बिछड़ा हुआ सा कोई,
जब पास सा आता है।
मन की ही ये माया है,
मन का ही ये श्रृंगार,
तू ही तो है अंतिम,
तू ही मेरा संसार।
-डॉ दक्षा जोशी’निर्झरा’
अहमदाबाद,गुजरात।




