साहित्य

जिस झाबुआ में साहित्य

रामशंकर चंचल 

जिस झाबुआ में साहित्य की बात करना बैमानी है वहां से सैकड़ों अद्भुत सामानों से सम्मानित डॉ रामशंकर चंचल

 

मध्य प्रदेश आदिवासी जिले झाबुआ निरक्षरता के नाम से जाना जाता हैं पर अद्भुत ईश्वरीय शक्ति आस्था सहजता सरलता और सुख सुकून का देव स्थल है

जहां साहित्य कला संगीत की बात करना बैमानी लगती है

उस झाबुआ से आज देश और दुनिया में साहित्य जगत में ख्यातीप्राप्त नाम है डॉ रामशंकर चंचल झाबुआ जिसने देश के ख्यातीप्राप्त बड़े प्रकाशनों से सम्मानित हुए है कृतियों को देश और दुनिया में दस्तक देते

प्रेमचन्द, रेणु, महादेवी, अज्ञेय , शुक्ल, गुप्त , पंत, टैगोर जैसे सैकड़ों अद्भुत सम्मनों से सम्मानित हुए डॉ रामशंकर चंचल झाबुआ को आदिवासी मसीहा सृजन जैसे एक मात्र देश का गौरव हासिल है

सैकड़ों भाषाओं को जन्म देने वाले सहज सरल व्यकित्व प्रभावित छवि सादगी के लिए बेहद चर्चित नाम है डॉ रामशंकर चंचल जिसने सैकड़ों प्रतिभाओं को साहित्य से जोड़ा है और सारी जिंदगी हिंदी भाषा की सेवा में लगा दी है

उन्हें आज हाल में इंकलाब पब्लिकेशन बंबई द्वारा प्रकाशित चर्चित रूह प्रेम कथाओं की कालजयी कृति वो गली वो मकान पर रूह प्रेम मलिका अमृता प्रतीम जैसे महत्वपूर्ण सम्मान से सम्मानित किया गया है

 

सचमुच धन्य हैं झाबुआ की पावन पवित्र धरा जहां साहित्य साधक डॉ रामशंकर चंचल जी का जन्म हुआ और सृजन शील रहते हुए सालों की साधना और तपस्या से आज देश और दुनिया में साहित्य जगत में ख्यातीप्राप्त नाम बन गया है

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