
बाते करता रहा
तुम्हारी तरह है
यह अपनी भीड़ से अलग
एकदम सहज सरल छवि
तेज धूप, आंधी तूफान
सब को नकारता हुआ
हरा भरा प्यारा सा
कोमल, सदा ही सब कुछ
सहन कर, सुख सुकून देता
देखो न आज मुझे भी
मेरे एकांकीपन को
दूर करता हुआ
तुम्हारा अहसास करते हुआ
मेरे पास साथ कितना
मस्त है स्वस्थ है खुश है
इसे देख कर
मैं भी मस्त हो गया
जब कोई मुझे देख
अच्छा महसूस करें तो
मन स्वतं उसे देख
सुकून महसूस करता है
यह प्यार और प्रेम का
अपनेपन का अहसास
बताने की जरूरत नहीं होती
वह ख़ुद अपनी अद्भुत
तासीर से हमारे मन और आत्मा को
झकझोर देता है और
हम उसमें अपनेपन का
अहसास करते हुए
अज़ीब सुकून महसूस करते
और क्या चाहिए जिंदगी जीने को
सुख और सुकून
जब वह मुझे मिल जाता है
तो जिंदगी दौड़ने लगती हैं
अपनी ही मस्ती में मस्त
प्रसन्न हो जीने के लिए
सारे दुःख भूल कर
सुख बांटने के लिए
प्रसन्नता लिए सदा
चाहिए वह अद्भुत तासीर
जानता हूं यह सब में
कहां, होती तो
मेरी तरह नहीं होते
जो सब कुछ खो कर भी
सब कुछ है का अहसास
तले दौड़ रहा है
अपने लक्ष्य में
सतत् कर्म पथ पर
वंदनीय हो तुम
वंदनीय है यह
खाखरे का सुखद अहसास
करता अजीब सुख सुकून देता
कोमल, मीठा, प्यारा मासूम छवि
लिए हरा भरा पता
सैकड़ों विशेषता समेटे
बिल्कुल तुम्हारी तरह
प्यार करते हुए
देखो न कैसे मस्त हो रहा है
मेरे संग जैसे तुम
मुझे पा कर
और मैं तुम्हें पाकर
हो जाती थे
होते तो हम आज भी हैं
खाखरे के पत्ते संग
प्रकृति की अद्भुत
अनुपम छटा संग
पक्षियों के कलवार संग
नदी की कल कल संग
न जाने कितने कितने
साथी हैं हमारे पास साथ
जो हमें अकेला नहीं होने देते
जानते हैं यह
हमारी विवशता थी
न चाहकर भी
एक दूसरे को छोड़ दे
क्यों कि हमारी उपस्थिति
कुछ अपनों की
अमानत है, संपति है
ओर हम दोनों ने
इस सच को स्वीकार करते हुए
स्वीकार किया था
छोड़ना जो ईश्वर को भी
अद्भुत रास आया
और वह हमें आज भी
उसी सुख सुकून का अहसास
नसीब करता हुआ
साथ है
तुम्हारी तरह रूह
सचमुच तुम्हारी तरह
प्रणाम ईश्वर शक्ति को
प्रणाम रूह सत् सत् प्रणाम
तुम्हें ओर तुम जैसे
जड़, चेतन, सब को
जो कभी हमें अकेला नहीं
होने देते
डॉ रामशंकर चंचल
झाबुआ मध्य प्रदेश




