
क्यूँ मिलन के बहाने भी कम हो गए।
इश्क़ के सिलसिले अब खत्म हो गए।।
बस इसी गम से आँखें नम है मेरी,
जब से यार हम तुम अलग हो गये
तुम कहा खो गए, हम कहा खो गए।1।
याद तेरी सदा हमको आती रही।
इस कदर यार मुझको सताती रही।।
सुन लो मेरे सनम, इश्क मे तेरे हम
जाने कितने ज़खम, अश्क़ से धुल गये
तुम कहा खो गए, हम कहां खो गए।।
हर घड़ी ढूँढती है ये तुझ को नजर।
फिर भी आये न तुम इधर लौटकर।।
ए मेरे हमसफर, ये है कैसा कहर,
छोड़ कर इस कदर, तन्हा जो हुए
तुम कहा खो गए, हम कहां खो गए ।।3।।
डॉ शिवदत्त शर्मा “शिवम”
जयपुर राजस्थान।
11 जुलाई 2026




