साहित्य

रामायण गाथा

डॉक्टर शशिकला

विष्णुना सदृशो वीर्ये सोमवत्प्र प्रियदर्शनः।

कालाग्नि सदृशः क्रोधे पृथ्वी समः।।

प्रभु राम त्रेता युग में विष्णु के सातवें अवतार ।

अयोध्या में जन्मे राजा दशरथ के बड़े पुत्र राम, किया जगत उद्धार ।

श्री राम 14 लोको के स्वामी ,राम नाम से होता भवसागर से बेड़ा पार।

शांत ,उज्जवल चंद्रमुखी दर्शन से, होता बेड़ा पार।

शीतल चंद्र सामान ,उनका सुंदर व्यवहार ।

चंद्र छवि प्रभु राम की ,जगत पर बलिहार ।

प्रभु राम अयोध्या में सबसे , चांदनी- सी शीतल करें मनुहार ।

सीता स्वयंबर में क्रोधित परशुराम भगवान को, शीतल वाणी से शांत कर ,पाया वरदान पुरस्कार।

प्रभु राम ने कालाग्नि -से, क्रोध से किया दुष्टौं का संहार।

वक्रासुर को पल में मिटाया ,सुखद किया संसार ।

ऋषि मुनियों के तप ,यज्ञ में जो करते राक्षस विध्वंस ,किया संहार ।

लंकेश रावण के अधर्म पर वध किया, प्रभु है पालनहार।

धरती -सा धैर्य प्रभु राम का ,सृजनहार ।

भक्त पर करें कृपा प्रभु ,भूले दंड का भार ।

कृपा निधान प्रभु है धरती- से ,करें कृपा सबके पालनहार।

धन्य प्रभु हम हुए ,जो आपकी भक्ति का मिला उपहार।

रचयिता

डॉक्टर शशिकला अवस्थी इंदौर मध्य प्रदेश

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