साहित्य

अमर शहीदों को नमन

डॉ अपराजिता

3 मई उन्नीस सौ निन्यानवे,

जब दुश्मन ने छल रचाया था,

कारगिल की ऊँची चोटी पर

कब्ज़े का स्वप्न सजाया था।

पर भारत के वीर जवानों ने

रण का ऐसा बिगुल बजाया,जो

26 जुलाई उन्नीस सौ निन्यानवे को

विजय-पताका बन फहराया।

बर्फ़ पिघली थी शोणित बनकर,

पत्थर भी अंगार हुए।

भारत माँ की रक्षा करते करते

कितने वीर अमर शहीद हुए।

कैप्टन विक्रम बत्रा की हुंकार थी

“ये दिल माँगे मोर!” सुनकर मुट्ठीभर सैनिकों का जागा था विजयी जोश

 

कैप्टन मनोज कुमार पांडेय का

साहस बलिदान आज भी है अजर-अमर

 

 

ग्रेनेडियर योगेन्द्र सिंह यादव का

अदम्य शौर्य महान रहा।

युद्ध में जीवित बचे वो आज भी है नई पीढ़ी के लिए मिसाल

 

राइफलमैन संजय कुमार का

रण में अनुपम मान रहा।

कारगिल की चोटी पर तिरंगा लहरा कर

उन्होंने ने भारत मां का मान रखा सभी शहीदों को शामिल कर गौरव पूर्ण इतिहास रचा

 

 

लेफ्टिनेंट विजयन थापर ने भी भारत माता पर अपने प्राण किए निछावर

 

हर अमर शहीद का बलिदान

भारत का मस्तक ऊँचा कर गया

उनके रक्त से लिखी कहानी

आनेवाली पीढ़ी को सिखलाती—

देश प्रथम है,प्रथम देश रहेगा,

सच्ची देशभक्ति यही कहलाती।

आओ, उनके चरण चिह्नों पर चलकर

भारत का सम्मान करें।

स्वार्थ, भेद सब दूर हटाकर

राष्ट्रधर्म का गान करें।

जब तक गंगा बहती होगी,

जब तक नभ में सूर्य रहेगा,

कारगिल के वीरों का यश

हर भारतवासी गाएगा।

26 जुलाई का पावन दिन

याद दिलाता

स्वतंत्र तिरंगे की हर धड़कन में है

वीरों का ऋण दोहराता।

आओ मिलकर शीश झुकाएँ,

अमर शहीदों को पावन श्रद्धा सुमन अर्पित करें।

उनके कारण सुरक्षित भारत,

उनके कारण ऊँचा नाम।

भारत माता की जय!

वंदे मातरम्!

 

डॉ अपराजिता शर्मा

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