
सावन को आने दो,
बदली को शोर मचाने दो।
खेतों में हरियाली सी छाई,
ओढ़ चुनरी धरती को इतरानें दो।
सुखी डालियों पे नव पल्लव खिलने दो,
प्यासें सागरो में मछलीयो को मचलने दो।
पशु-पक्षी नाचे जंगल में मंगल का शोर हो,
भंवरें जब मंडराए कलियों को शर्मा ने दो
सावन के झूले मे जरा हमें मुस्कुराने दो,
तनिक ठहऱों मालपुआ खाने मायके तो आने दो।
मन का मोरिया नाचे पिया की पहली मुलाकात है,
घनघोर घटाएं संदेश लाए सावन आया,सावन को आने दो ।
हमें भी थोड़ा रूठें पिया को मनाने दो।
सावन की बूंदों को जरा दिल धड़काने दो।
साजन की बाहों का प्यारा सा झूला हो,
मुस्कान के जाम हमें अधरों से टकराने दो।
सावन को आने दो सुखी धरती को लहराने दो।
फुहारों को प्यार का पैगाम दिल पे लिखने दो।
दो दिलों में मिलन की तड़फ तो उठे प्यारे,,
जाने कहां वो ,उनका कुछ तो संदेश आने दो।
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शिवा सिंहल आबुरोड



