
मानव जन्म है मूल्यवान, छल कपट त्यागो ,परोपकार से पार लगे जीवन वैतरणी, तुम हो इंसान।
छल कपट छोड़ ,सद्भावना सहयोग, खुशी पथ पर चलो इंसान।
निजी स्वार्थ में दहशत फैलाने से, होता है देश, परिवार का नुकसान।
मानवता की फुलवारी को महकाओ, छल कपट करके न बनो नादान।
निजी स्वार्थ की आंधी से, जीवन में आता बड़ा तूफान ।
परमार्थ हर हाल में करो,खुश रहोगे, ईश्वर होते मेहरबान ।
निजी स्वार्थ में छल कपट ,शोषण, अन्याय, भ्रष्टाचार से न बनो बेईमान।
सत्यनिष्ठा, कर्मठता से करो ,जीवन लक्ष्य संधान।
निस्वार्थी ,परोपकारी इंसान के ,पूरे होते हैं सारे अरमान।
दीन दुखियों की करो मदद, दो सबके चेहरे पर मुस्कान ।
अपने -पराए का भेद भूल कर सेवा करो ,मिले अमिट पहचान ।
कपट का त्याग करो, परोपकार से हो जीवन वैतरणी पार ,बनों निस्वार्थी इंसान।
मानव जन्म मिला सौभाग्य से, मानो प्रभु का एहसान ।
माता-पिता ,गुरु ,भाई -बहन ,अन्य रिश्तो के बनो कद्रदान ।
निजी स्वार्थ में छल कपट से अंधे न बनो, प्रेम से रिश्ते निभाओ ,दुनिया में हो 2 दिन के मेहमान ।
निजी स्वार्थ त्याग कर बनो परोपकारी, मानव जन्म है मूल्यवान।
अन्यथा छल कपट तो कैसे पार लगे वैतरणी -जीवन नैया, सोचो नादान इंसान ।
रचयिता
डॉक्टर शशिकला अवस्थी इंदौर मध्य प्रदेश



