
घुमड घुमड बरसे बदरा
बरखा मोती बिखराये
ग़रज़ ग़रज़ गुनगुनाए
सावन तुम आ जाओ
घूम घूम मस्त मगन हो
मयूर नर्तन दिखलाये
पिहू पिहू सुर लगाये
सावन तुम आ जाओ
सरक सरक शाखाओं पर
सरस सारिका मंडराये
सुर सुरीला संग सुनाऐ
सावन तुम आ जाओ
चंचल चंचल चले पवन
चित्त को चंचल कर जाएँ
विचर विचर कजरी गाए
सावन तुम आ जाओ
मीनाक्षी शर्मा



