साहित्य

मामूली से ऊपर उठ कर खास बनते देखा है

एस के कपूर

आपके कर्म एक दिन आपकी, पहचान बन जाते हैं।

आपके बोल हर दिल पर एक, निशान बन जातें हैं।।

जो मुश्किल में हार नहीं ,मानते जीवन में कभी।

वह जमीन से ऊपर उठ कर, आसमान बन जाते हैं।।

2

जीने को तो यहाँ जिंदगी, हर कोई जी ही लेता है।

हार से घबरा कर बस घूंट, गम के पी ही लेता है।।

लेकिन जो जिंदगी के,इम्तिहान को रहते हैं तैयार।

वह अपनी किश्ती तूफानों, में भी खे ही लेता है।।

3

आत्म विश्वास मानव की , सर्वोत्तम पूंजी होती है।

निरंतर अभ्यास लगन ,सफलता की कुंजी होती है।।

परिश्रम से राह के काटें भी,खिलते जाते फूल बनकर।

नीचे रह कर भी उनकी,अंतिम छलांग ऊंची होती है।।

4

इन आँखों ने लोगों को , इतिहास बनते देखा है।

अपने कर्मों से सफल , बेहिसाब बनते देखा है।।

मंजिल आँखों से ओझल , देखा है उसको पाते।

मामूली से ऊपर उठकर, उनको खास बनते देखा है।।

रचयिता।।एस के कपूर”श्रीहंस”

बरेली।।

©. @. skkapoor

सर्वाधिकार सुरक्षित

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