साहित्य

दिल लगाया प्यार में तो फ़ैसला मैंने किया

ममता झा

दर्द जो भी था मिला, हँसकर उसे अपना किया

प्यार का हर एक रिश्ता, नेह से गहरा बना।

स्वार्थ ने आकर मगर, सब फ़ासला पैदा किया।।

 

रात भर यादों ने आकर, चैन मेरा छीन लिया।

चाँद ने तन्हा गगन में, साथ फिर मेरा दिया।।

 

आँधियों से क्या डरेंगे, हौसले ज़िन्दा रहे।

राह काँटों की सही, विश्वास ने तय कर लिया।।

 

झूठ के बाज़ार में अब, सच बहुत तनहा मिला।

लोभ ने इंसानियत का, हर निशाँ धुँधला किया।।

 

प्रेम पूजा है हृदय की, खेल इसको मत कहो।

रब ने दिल से दिल मिलाकर, नेह का सज्दा किया।।

 

“झा” दुआ है उम्र भर, अपनापन जीवित रहे।

प्रेम ने हर बार जग में, द्वेष को छोटा किया।।

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ममता झा मेधा

डालटेनगंज

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