
आने वाले साल को प्रणाम,
जाने वाले साल को प्रणाम।
क्या खोया , क्या -क्या पाया,
क्या पाया अब तक—करो विचार।
भागदौड़ में दिन यूँ बीत गए,
सच–झूठ का अंतर भूल गए।
रिश्तों को कितना समय दिया,
या बस सपनों के पीछे दौड़ गए।
कितने आँसू, कितनी मुस्कान,
कौन था अपना कौन पराया कितनी की पहचान।
गलतियों से क्या – क्या सीख लिया,
या दोहराई वही पुरानी बात.…
जाने वाले साल को प्रणाम,
आने वाले साल को प्रणाम।
मन में कर लें आज ये वादा,
इंसानियत रहे सबसे महान।
मत रखो कोई इरादा।
सच से करो,ये बादा,
भूल हुई जो भी हैं…
उनका करे सुधार।
प्रभु से किया था वादा,
नहीं निभाया बिल्कुल क्यों?
स्वार्थ में समय बिताया,
इसपर करो विचार,
सीता सर्वेश त्रिवेदी शाहजहांपुर



