आलेख
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दिल्ली में लापता होने की बढ़ती घटनाएँ
दिल्ली एक ऐसा शहर है जिसे सपनों की राजधानी कहा जाता है। देश के कोने-कोने से लोग यहाँ रोज़गार, शिक्षा…
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श्वेत नगरी आनंद का रत्न, डॉ. शैलेष वाणिया ‘शैल’
संघर्ष की जीती-जागती मिसाल, जो खुद भावना का पर्याय है, जिसकी पर्सनैलिटी साफ हो गई है। लगातार संघर्षों, चुनौतियों, रुकावटों,…
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लोकतंत्र का ‘मॉर्डन सर्कस
आज का भारतीय लोकतंत्र एक ऐसे ‘मॉर्डन सर्कस’ में तब्दील हो चुका है, जहाँ प्रकृति के शाश्वत नियम उलट दिए…
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बिहार से लंका तक: साहित्य, श्रद्धा और संस्कृति
बिहार की मिट्टी से कोलंबो के आसमान तक मेरी यात्रा 8 जनवरी 2026 को अरवल जिले के करपी से शुरू…
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अब आया ऊँट पहाड़ के नीचे
भारत और अमेरिका के बीच हाल में हुए व्यापारिक समझौते ने केवल दो देशों की नीतियों को ही नहीं बदला,…
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नौटंकी में विदूषक क परम्परा
नौटंकी में विदूषक क परम्परा (जोकर,विदूषक,सूत्रधार,भाँड या रँगारंगोली) जइसे रंगमंच के प्रस्तुतियन में सूत्रधार क भूमिका अहम होले उ बीतल…
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आधुनिक विकास में ‘नैतिकता’ का पतन
आज संसार में अस्तित्व के संबंध में जानकारी प्राप्त करने के लिये जो विचारधाराएं मौजूद हैं, उनमें पहली यह मानती…
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अट्टालिका संस्कृति…
अट्टालिका यानी भौतिकवादी तरक्की का पैमाना, विकास की गति का पैमाना, शहरीकरण और शहरी संस्कृति का पैमाना। दुबई घूमकर आयी एक…
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संत रविदास जी की वर्तमान में प्रासंगिकता
संत रविदास जी मध्यकालीन भारत के उन महान संतों में हैं जिन्होंने भक्ति आंदोलन को केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि…
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अनुशासन के बिना अधिकार : सामाजिक असंतुलन की जड़
आधुनिक सामाजिक विमर्श में अधिकारों की चर्चा जितनी मुखर है, उतनी ही मौन अनुशासन और कर्तव्य की बात हो गई…
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