साहित्य
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साहित्य की असल ख़ूबसूरती उसकी सच्चाई में है
साहित्य का असली मक़सद तो समाज की सच्चाई को उजागर करना, लोगों के जज़्बात और दर्द को आवाज़ देना था।…
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चतुर्थ स्वरूप माँ कूष्माण्डा देवी वंदन
आई हूँ मैया, बेड़ा पार करो, मझधार में है नैया, बेड़ा पार करो। अष्टभुजी मैया कूष्माण्डा का पूजन, अजन्मा आद्याशक्ति…
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बाला वार्णिक छंद में मैया पार्वती
पार्वती माँ तुझे मैं सजाऊँ। पुष्प माला चढ़ा के रिझाऊँ।। पालकी की सवारी सजी माँ। गीत में रागिनी है बजी…
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ताबीज एक प्रश्न, एक विश्वास
गले में बंधा एक छोटा सा धागा, और उसमें लटका ताबीज, क्या सच में बदलता किस्मत की डोर या बस…
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तुम्हारे लिए
1* जीवन बड़ा अनुराग भरा, मिल गया रिश्ता, तुम्हारे लिए। 2* ज़िन्दगी चल पड़ी आगे, दो पहियों पर, तुम्हारे लिए।…
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भोले की भोली सूरत …
भोले नें भोली सूरत से, मन दुनिया का कैसे मोह लिया, थोड़ी-सा चंदन तन पे लगा, और अहं से नाता…
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प्यास का कल
आज भी नल से गिरती हर बूँद चुपचाप कुछ कह जाती है, पर हम हैं कि उसकी आवाज़ को अक्सर…
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दूर के ढोल सुहावने लगते हैं – लोकोक्ति
क्यों लगते हैं ढोल दूर के हमको खूब सुहाने? दादा जी ऐसा क्या इनमें लगे जो मन को भावने? दादा…
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कहती है कुछ कर कविता
कहती है कुछ कर कविता —- जीवन की रसधार कविता यादों की बौछार कविता भूखे की रोटी जैसी है सावन…
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दरबार
चोरों के दरबार में चोर ही बना चोकीदार गीध दृष्टि लगी हुई है मंच पे बैठा सरदार लाज शर्म की…
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