साहित्य
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शब्दों का उत्सव
जब मौन हृदय की पीड़ा बोले, तब कविता आकार लेती है। सूनी आँखों की हर बूंद में, एक नई धार…
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गौरेया: एक नन्हीं वास्तुकार
मेरे नए घर में गौरेया का बसेरा है, कमरे की खिड़की पर उसनें डाला डेरा है । रोज़ सभी तिनका…
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कविता
कविता मेरा जीवन है, कविता में बसती जान है, विधा आदि से नहीं मोहब्बत, मां पूजा ही अरमान है, जो…
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माँ ब्रम्हचारिणी
माँ ब्रम्हचारिणी आ जाओ ये मन तुम्हैं पुकार रहा! आकर मइया दर्शन दे जाओ ये मन तुम्हैं निहार रहा!! एक…
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प्राकृतिक सौंदर्य
आया है ऋतुराज सखि, प्रकृति करे है शोर। नाचें गाएँ झूम के,करे मदन है जोर।। करे मदन है जोर,सभी उत्साहित…
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अंतर्राष्ट्रीय प्रसन्नता दिवस पर कविता
मुस्कान का दीप जलाओ आज, मन के आँगन को सजाओ आज। छोड़ो दुख की सारी परछाईं, खुशियों का गीत सुनाओ…
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गाता वसंत गीत
लिख भावना प्रधान,हो छंद का विधान। जगदीश की पुकार,सुन कीजिये सुधार।। गाते चले सुगीत,हो भाव भी प्रतीत। गाता बसंत गीत,हो…
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20 मार्च विश्व गौरैया दिवस
नीले गगन की गोद में, खोई सी एक कहानी है, सूने आँगन की खामोशी में, गौरैया की निशानी है। कभी…
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विश्व कविता दिवस
कोई तुमसे पूछे अगर कभी, मै कौन तुम्हारी लगती हूँ, तुम इतना ही बस कह देना, मैं स्वप्न सृजन के…
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दुर्गा मातारानी द्वितीय रूप- ब्रम्हाचारिणी
तुम्हीं हो मैया ब्रम्हाचारिणी तुम्ही हो मैया कष्टों को हरने वाली। समृध्दि और वैभव का प्रतीक है एक हाथ में…
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