साहित्य
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विरह की वेदना
बिन सूना लगता जीवन, सूना हर उत्सव-पर्व है, मन के आँगन में बस छाया विरह-वेदना का गर्भ है। चाँद…
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छंदमुक्त कविता (संवाद शैली)
त्नी:- “चलो खरीद लायें एक एसी, उमस भरी यह जून की गर्मी, सहा नहीं जाता है यह ताप, यह स्वेद…
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समाचार
समाचार – नई अनुकंपा नियुक्ति नीति की विसंगतियां दूर किए बिना आश्रितों को नहीं मिलेगा लाभ: राकेश पाठक …
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दि ग्राम टूडे)
अन्तर्राष्ट्रीय साहित्यिक मंच द्वारा जयचन्द प्रजापति को “श्रेष्ठ रचनाकार सम्मान’ से सम्मानि व्यंग्यकार जयचन्द प्रजापति को ‘अन्तर्राष्ट्रीय कलम के सशक्त हस्ताक्षर…
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सुनो संताप वसुंधरा का,,,
संताप वसुंधरा का, कैसे धरा रो रही है आज? दुखी है वन सूखी नदियां, गिर पड़ी है इन पर गाज।…
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मानवता
वता शब्द नहीं, एक एहसास है, धर्म की दीवार से ऊँचा, जाति से परे, वो हाथ जो बिना पूछे थाम…
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सुगंध
सुगंध वो स्वाद सिर्फ तेरे हाथ में आता नए नए व्यंजनों के साथ तू रोज़ बघार लगाती माँ तेरे हाथ…
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नमन मंच
दुनिया का महान पुरुष था , जिसका शौर्य निराला था ,कवच में वजन बहत्तर था ,भाले में वजन इक्यासी था…
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पारस की ख़ोज
त्थर पारस ढूंढ रहा इंसान आज, भूल गया खु़द का असली मिज़ाज लोहे जैसा सख़्त हुआ दिल सबका, खोया…
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