साहित्य

  • खुशी

    मैंने खुशी से पूछा— “तू मिलती क्यों नहीं?” खुशी मुस्कुराकर बोली— “मैं छुपी नहीं हूँ, तुम ढूँढते गलत जगह हो।”…

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  • मैंने इनता कुछ खोया हैं

    मैंने इनता कुछ खोया हैं अब पाने से डर लगता हैं, मेरे जीवन में आने वाली,खुशियों से भी डर लगता…

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  • कर्म , कृत्य , काम

    कर्म कर तू कर्म कर , कर्म में ही धर्म कर । न रो पछता भाग्य पे , कर्म में…

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  • हर दिन नारी का

    मुझे किसी एक दिन की रोशनी नहीं चाहिए, मैं तो सूरज की तरह हर सुबह उगती हूँ। संघर्ष की धूप…

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  • अजेय योद्धा अहिल्याबाई होल्कर

    वीरांगना अजेय योद्धा रहीं,अपराजिता कहाती थी। कवियों और कलाकारों को,सम्मान सहित बुलाती थी। भारतीय नारी के हित में, किए अनेकों…

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  • नवरात्रि से पहले

    पहले तो स्वीकारिए मैया मेरा प्रणाम और ध्यान से तब सुनो बात मेरी अविराम फिर जो करना है, कीजिए आगे…

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  • .माँ की गोद

    माँ की गोद आज जिन्हें मयस्सर हो गई कितने खुशनसीब है जन्नत नसीब हो गई मिलता नहीं है जिन्हें कभी…

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  • नव संवत्सर

    आगत है नव संवत्सर की बेला, लाएगी संग अनगिनत बहारें । माता का दरबार सजेगा गुड़ी पड़वा का पर्व मनेगा।…

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  • मिट्टी का घड़ा

    कुम्हार उठा सुबह सवेरा, ले आया मिट्टी का ढेर घनेरा। प्यार से उसे गूंथा, थामा, सपनों का एक रूप रच…

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  • मन की परछाइयां

    मन के सूने गांव में कभी-कभी, परछाइयों का लगता मेला है। चारों तरफ रिश्ते ही रिश्ते हैं, फिर भी मन…

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