साहित्य
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हरियाणा में हरियाणवीं भाषा की उपेक्षा : एक समीक्षात्मक अध्ययन
हरेक समाज की आत्मा उसकी भाषा में बसती है। भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं होती, बल्कि एक पूरी संस्कृति,…
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स्वतंत्रता के बाद का भारत
स्वतंत्रता के बाद का भारत, वीरों के बलिदानों पर, हुए कुठाराधात का भारत, आंधी-झंझावात का भारत। राजनीति की शतरंजों…
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गजल
काफिया —अन की बंदिश रफीद —ढूॅंढ़ता हूॅं मैं। बहर -2122–2222–2122-2=24मात्रा प्यार कान्हा से अपनापन ढूँढ़ता हूँ मैं, प्रेम रिश्तों…
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विश्व बाल श्रम दिवस
उम्र जिसकी तितली पकड़ने की, वो ईंटें ढो रहा है किताबों की जगह हाथों में हथौड़ा रो रहा है स्कूल…
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लघु कथा पहले तुम, फिर मैं
आज बस अचाचक याद आ गया, तुम्हारे प्यार का यह बेहद सुकून देता अहसास जो, जीवन में पहली बार महसूस…
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कवि और कविता
. कवि और कविता तुकबंदी करता कवि, एक व्यक्ति नहीं है, बल्कि सामाजिक चेतना की अभिव्यक्ति है!…
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आज की –नारी
कभी – नारी होती थी पूज्यनीय-बचपन से बुढ़ापा तक किन्तु – आज की-नारी- है लाचार रोज पढ़ो और सुनो -नारी-उठती…
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तेरी मुस्कुराहट
मुस्कुराती हो तुम झूम उठता मेरा दिल नीले बादलों में खुली घटाओं में सिर्फ लगता हैं शायद तुम मुस्कुरा रही…
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कविता
हँसी तुम्हारे चेहरे पर, जैसे है सुबह की उजली धूप, जो भर देती है दामन मेरा-, खुशियों से- उमंगों से-…
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