साहित्य
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रामनवमी
अयोध्या मे राम पधारे कौशल्या के राजदुलारे श्याम वर्ण की काया में सुर्य सा तेज मूख में। ललाट पर टीका…
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मेरे एहसास
कभी कभी घने दिखने वाले दरख़्त अंदर से बेहद कमज़ोर और खोखले भी होते हैं छांव तो सबको देते हैं…
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पूर्णिका
दिल की उन यादों को सबसे मैं छुपाऊँ कैसे मानता अब दिल नहीं तो मैं मनाऊँ कैसे ।। नेह 1…
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तब हम हर्ष मनाते हैं
जाड़ों का जब कोप दूर हो, तब हम हर्ष मनाते हैं अम्बे मां का जब हो आगमन तब नव वर्ष…
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कैसे मैं पागल हो गया तेरे इश्क में
कैसे मैं पागल हो गया तेरे इश्क में, दिल खो गया जाने कब तेरे इश्क में। तेरी हँसी की धूप…
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पूर्णिका- हर्षित स्पंदित मधुमास
प्रारम्भी नेह:– खिले प्रसून पल्लवित वाटिका, सुहानी पवन सुगंधित है। मधुप मधुकर पुंज झूम रहे, कलि-कलि खिल स्पंदित है।१। मलय…
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पूर्णिका
दिल में वो प्यार से समाए हैं पर नज़र क्यों नहीं वो आए हैं उनकी बंशी की धुन हमें सुनती…
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सरसी छंद मुक्तक एवं दोहा मुक्तक
भरत भूमि है वीर प्रसूता, प्रकृति मिली वरदान। अनुपम रचना प्रभुवर की है, नारी सृष्टि महान। सारी बाधा जो हर…
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ग्रीष्म ऋतु
आई फिर ग्रीष्म ऋतु धूप में ना निकल तूं जल रहा है तन मन बारिश होनी चाहिए। बाल, वृद्ध, नारी…
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मेरी परछाई
मेरे साथ-साथ जो चलती है, वो मेरी परछाई है, मुझसे भी लंबी दिखती, जैसे कोई गहरी खाई है। अंधेरे में…
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