साहित्य
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उम्मीद
उम्मीद है, की तुम कभी अपनी उम्मीद तो नहीं हारते होंगे? भले थोड़ी देर रूक के भी रास्ता अपनाते होंगे?…
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हे रघुनन्दन मेरे राम
हे करुणाकर हे रघुनंदन, मेरे राम। अवधपुरी में सरयू के तट, जिनका धाम। हे घट वासी हे वनवासी, हो प्रभु…
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अभ्युदय की स्वर्णिम बेला:नवसंवत्सर(कविता)
भारतीय संस्कृति का अनुपम, यह पर्व अनूठा प्यारा है, नवसंवत्सर की प्रथम किरण, जन-जन का भाग्य सितारा है। चैत्र शुक्ल…
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भारत माता
स्वदेश है विदेश नहीं , विशेष है अवशेष नहीं , है प्यार यहाॅं द्वेष नहीं , बंधुत्व है आवेश नहीं…
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बहार
आज अवध में बँटे बधाई, छाई अजब बहार जी । रामलला का जनम हुआ है, खुशियाँ अपरम्पार जी ।। चैत्र…
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उनका नेह निमंत्रण एक धोखा है
राजनीति में मेरा कोई लगाव नहीं, कोई नेता मंत्री बन कर आ जाये, मेरा उसके वादों में विश्वास नहीं, हाँ,मेरी…
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प्रेमपत्र
उंगलियों में शब्द बनकर, दिल की धड़कन रख देती हूँ, जो कह न पायी कभी जुबाँ से, उसे काग़ज़ पर…
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मेरी जीवनसंगिनी — सरिता
मेरे जीवन की मधुर कहानी हो तुम, थके मन की शांत रवानी हो तुम। सूझ-बूझ से हर पल सँवार देती…
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क्यूं बन बैठा जग में शैतान
पाप की ये महल पाप कर्म से जो बनाई रह लो चन्द दिन खुशी से बन कर जमाई तेरी कर्मों…
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भोलेनाथ कृपालु
शिव शंकर त्रिपुरारी,भक्तों के हितकारी, करुणा के भंडारी, शंभू भगवान जी। डमरू नाद सुनाते,जग को मार्ग दिखाते, भटके जन को…
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