साहित्य
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एक दिन कहानी बन कर चले जाओगे।
एक दिन कहानी बन कर चले जाओगे। लिखोगे अच्छी तो सबको ही याद आओगे।। ** दिल में जगह बना लेते…
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कुकुभ छंद में परमात्मा की स्तुति
देवों के देव महेश्वर को , करूँ नमस्ते वरदानी। हे कतुक्षयी अंधविमोचन, वंदे कनकपुत्र ज्ञानी।। ज्ञान नहीं ओंकारेश्वर हे, शिव…
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मासूम को पटक-पटक मारने से मैं बहुत आहत हुआ
मासूम को पटक-पचाहे जितना साहित्य लिख डालिये पर समाज में कुछ ऐसे दरिंदे रहते हैं जो दरिंदगी इतना कर जाते…
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आज के लिए एक रचना
*अधूरी चिट्ठी* अधूरी चिट्ठी के कोने पर, कुछ शब्द ठहरे रहते हैं, जो कह न सके थे होंठ कभी, वे…
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रोला छंद
बढ़ता जाता ताप, धरा का उर अकुलाए। क्रोधित होकर सूर्य, अग्नि नभ से बरसाए।। सूख गए भू कूप, हिमालय नग्न…
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ग़ज़ल
तेरा होना ही तो मेरी दुनिया बदल रहा है। अंधेरों में घिरा दिल, अब खुद जल रहा है। कदम…
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वो प्यार का पहला ख़त
वो प्यार का पहला ख़त जब तुझको लिखने बैठा था, दिल धड़क रहा था ऐसे जैसे कोई सपना ऐंठा था।…
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वसुंधरा
वसुंधरा तू धैर्य की, अनुपम सुंदर शान। तेरी गोदी में बसा, जीवन का सम्मान।। हरी चुनरिया ओढ़कर, करती जग श्रृंगार।…
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जल संरक्षण
न करना जल को तुम बर्बाद जल से ही जीवन मिलता है, इतना रखना याद …… जल – स्तर घटता…
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जल संरक्षण
सर्दियों का आग़ाज़ हो चुका था। क़श्मीर की हसीन वादी पर सफ़ेद बर्फ़ की चादर बिछने को बेताब थी। ‘श्रीनगर’…
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