साहित्य
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एहसास क्रोध
रात के साढ़े ग्यारह बज गए थे । सुरुचि की बेचैनी बढ़ती जा रही थी । दो साल का बेटा…
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यादों की पोटली
ज़िंदगी के पल यूँ ही गुजर जाते हैं, समय की धारा में अक्सर बिखर जाते हैं। जो ठहर कर उन्हें…
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कवि का समीक्षक (हास्य-व्यंग्य)
एक बार एक कवि समीक्षकों का इंतजार कर रहा था कि कोई समीक्षक खुद आये उसकी रचनाओं पर समीक्षा के…
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दर्पण से संवाद
दर्पण तुझसे पूछती, कैसा हो . श्रृंगार। आने को हैं साजना, पहनुँ कैसा हार।। कैसे मैं जूड़ा करुं, कैसे रंग…
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बेमौसम की आई बरसात
बदरी की चादर में लिपट दिखलाई चुपके से वर्षा रानी आसमां पे आई रिमझिम रिमझिम बुन्दों की…
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मुक्तक
मुक्तक सत्य का यह वायदा। अंत में हो फायदा।। जीत का सिरमौर हो- शुभ्र हो यदि कायदा।।१। मृत्यु तो बदनाम…
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मुद्दत
कहांँ दिलों की बात करते इस ज़माने में हमें फ़ुर्सत नहीं है फ़रेब खाने से!! दिल रोज़ टूटता है हमारा…
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पालन और अनुशासन
हर मात पिता के मन मे हर पल ये बात है आए अपने प्यारे बच्चों को अनुशासन में कैसे लाएं…
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हो गये साठ के पारअभीअसली इम्तिहान बाकी है।
1 सफर जारी पर अभी तो आने को मुकाम बाकी है। किया जा चुका बहुत कुछ पर अभी काम बाकी…
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तुम सांझ ढ़ले चले आना
हो चला वक्त सूरज के ढलने का आभा सिंदूरी सी हो गई है, अवसान दिवस का हो चला है सांझ…
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