
शीश कफन को बाँध कर,धरें हृदय में धीर।
शपथ समर्पण का लिए,वचन निभाते वीर।।
ग्रीष्म शरद हेमंत या,रहे शिशिर का अन्त।
वतन रक्ष्यते वे सदा, रहते अडिग अनन्त।।
घर सैनिक की भामिनी, रात बिताए जाग।
याद पिया की आ रही, गाती राग विहाग।।
नमन वतन के लाल को,करते सतत कमाल।
अमन देश में ला रहे, भगत सरिस हैं लाल।।
सुमन सलोने खिल गये,महक रहा है बाग।
बैठ शज़र पर कोकिला,मधुर सुनाये राग।।
सुबह जगाता नींद से,अरुणशिखा दे बाग।
नयन खोल रे साजना,ईश नमन कर जाग।।
धरती करती है जतन,रखती अन्न समेट।
दुखिया दीन अमीर का,भरती रहती पेट।।
चनरेज राम अम्बुज



