
मधुमास का मास ये आया, छाई सरस बहार,
मनभावन मौसम है आया, शीतल चली बयार ।
हरित पीत सी धरा सुहानी, सजे खेत खलिहान
खेतों की जो देखे शोभा, खिल जाये मुस्कान
भ्रमर कली को देख-देख कर, झूम रहा संसार ॥
धरा सजी अनुपम अलबेली, भरा हुआ उल्लास
खिली हुई हैं मधुरिम कलियाँ, लो आया मधुमास
खुशियों के रंगों से सजकर, धरा करे श्रृंगार ।
उर में सुमधुर सुर है गूँजे, कोयलिया का गान
कली-कली पर भँवरे करते, मधुरस का रसपान
वन उपवन में गूँज रही है, भौरों की गुँजार।
विनीता चौरासिया
शाहजहाँपुर उत्तर प्रदेश



