साहित्य

मेरे प्यारे दोस्त

कुलदीप सिंह रुहेला

मेरे प्यारे दोस्त, तू साथ हो तो बात बने,
सूनी सी राहों में भी बरसात बने।
तेरी हँसी की गूँज जब दिल तक आती है,
हर थकी हुई साँस फिर गीत गुनगुनाती है।
तू है तो डर भी हिम्मत से हार जाता है,
हर मुश्किल का चेहरा खुद घबरा जाता है।
चाय की प्याली, अधूरी सी बातें,
तेरे संग पूरी लगती हैं सारी रातें।
कभी रूठना, फिर हँस के मनाना,
यही तो होता है दोस्ती निभाना।
मेरे गिरने पर तू ढाल बन जाता है,
मेरे सच को दुनिया से लड़ना सिखाता है।
न पैसा बड़ा, न शोहरत का शोर,
तेरा साथ ही है सबसे बड़ा ज़ोर।
कल क्या होगा, इसकी चिंता नहीं,
आज साथ हैं, बस इससे बेहतर कुछ नहीं।
मेरे प्यारे दोस्त, तू पास रहे,
हर जन्म में यही एहसास रहे।
लिखूँ मैं गीत या गाऊँ हर रोज़,
हर सुर में बस नाम हो — मेरा दोस्त।

कुलदीप सिंह रुहेला
सहारनपुर उत्तर प्रदेश

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