
हिम से ऊंची आशाओं का,
मीठी बोली भाषाओं का।
मन में आए अरमानों का,
आज बिछाया जाल मुबारक साल नया।।
1/पृथ्वी लाई फूल सजाकर,
बना है दीपक स्वयं प्रभाकर।
आया करने अर्पण बसंत,
इन फूलों की शाल मुबारक साल नया।।
2/गगन भी आया बांह पसारे,
अंबर में भी टिमटिम तारे।
चले पवन भी करने अब तो,
नई साल से प्यार मुबारक साल नया।।
3/बादल नाच नाचते आए,
सूरज भी नई-नई लाली दिखाए।
करता पेश मंजुल भी अब तो,
नूतन वर्ष का थाल मुबारक साल नया।।
मनोज मंजुल ओज कवि कासगंज जनपद कासगंज उत्तर प्रदेश




