
सावित्री का जन्म मनायें l
उनकी शिक्षा को अपनायें ll
जन्म कृषक के घर में पाकर,
उन सी कुछ खेती कर जायें l
नित शिक्षा की खेती करके,
भारत को शिक्षित कर जायें l
उनके जैसा शिक्षक बनकर,
सबको उत्तम पाठ पढ़ायें l
था नारी का पढ़ना दूभर,
ऐसे में वह पढ़ने जायें l
सबको शिक्षित करने के हित,
उनके जैसा कष्ट उठायें l
हर विरोध का कर मुकाबला,
नारी को शिक्षित कर जायें l
चलो गाँव की ओर बढ़ें हम,
हर अनपढ़ को नित्य पढ़ायें l
जन्म मनाना तभी सफल हो,
जब सबको शिक्षित कर पायें l
‘ईश्वर’ यह सम्भव तब होगा,
जब हम अपना कदम बढ़ायें l
ईश्वर चन्द्र विद्यावाचस्पति, मेंहदावल, जिला. संत कबीर नगर (उत्तर प्रदेश)




