साहित्य

ग़ज़ल

डॉ उषा किरण

दर्द पीकर मुस्कराना सीख लें।
आ ग़मों को गुनगुनाना सीख लें।

एक कतरा भी मिले तो ग़म नहीं-
बूंँद से सागर बनाना सीख लें।

हर ख़ुशी अपनी नहीं तो क्या हुआ-
सब्र से रिश्ता निभाना सीख लें।

राह आसां है नहीं फिर भी मग़र –
मील में पत्थर लगाना सीख लें।

ग़र अंधेरा है बहुत इस राह में-
रोशनी को खींच लाना सीख लें।

नाव को देते डुबा मांँझी यहांँ –
कश्तियांँ ख़ुद से चलाना सीख लें।

आसमां सजदा ‘उषा’ तेरा करे-
कद ज़रा अपना बढ़ाना सीख लें।

डॉ उषा किरण
पूर्वी चम्पारण, बिहार

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