
दर्द पीकर मुस्कराना सीख लें।
आ ग़मों को गुनगुनाना सीख लें।
एक कतरा भी मिले तो ग़म नहीं-
बूंँद से सागर बनाना सीख लें।
हर ख़ुशी अपनी नहीं तो क्या हुआ-
सब्र से रिश्ता निभाना सीख लें।
राह आसां है नहीं फिर भी मग़र –
मील में पत्थर लगाना सीख लें।
ग़र अंधेरा है बहुत इस राह में-
रोशनी को खींच लाना सीख लें।
नाव को देते डुबा मांँझी यहांँ –
कश्तियांँ ख़ुद से चलाना सीख लें।
आसमां सजदा ‘उषा’ तेरा करे-
कद ज़रा अपना बढ़ाना सीख लें।
डॉ उषा किरण
पूर्वी चम्पारण, बिहार




