साहित्य

पैसा, वक्त और संस्कार

विद्यावाचस्पति डॉ कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’

पैसा और वक्त दोनों ही मूल्यवान हैं,
जीवन में दोनों की बड़ी अहमियत है,
दोनों में फ़र्क़ बस इतना होता है कि
हमारे पास पैसा कितना है हमें पता है।

परंतु हमारे पास वक्त कितना बचा है
शायद किसी को पता नहीं होता है,
इसलिए पैसे का उपभोग तो खूब करो,
लेकिन वक्त का हर क्षण सदुपयोग करो।

जीवन में ख़तरे लेना ही पड़ता है,
फिर चाहे पैसा हो या चाहे वक्त हो,
दोनो में अगर जीत होती है तो हमें
आगे आगे बढ़ने का अवसर मिलता है।

अगर दोनों व्यर्थ हो जाते हैं तो आगे
बढ़कर बाधा हटाने का मौक़ा मिलता है,
इसीलिए वक्त रहते पैसा कमाना है
और दोनों का हर सदुपयोग करना है।

पैसा और वक्त दोनों का ही हमारे
संस्कारों से गहरा नाता होता है,
दोनों ही सुसंस्कार देते भी हैं और
दोनों संस्कार विहीन भी कर देते हैं।

संस्कार परिवार समाज से अलग
नहीं जुड़कर रहने से ही मिलते हैं,
जैसे पत्थर तभी तक साबुत होते हैं
जब तक पर्वत से जुड़े हुये रहते हैं।

पत्ते तब तक हरे रहते हैं जब तक
वह पेड़ की डाली से लगे रहते हैं,
इंसान भी तभी तक सशक्त होते हैं
जब तक घर समाज से जुड़े रहते हैं।

पैसा, वक्त, संस्कार व परिवार
सभी समाज के लिए ही होते हैं,
आदित्य इनका जितना सदुपयोग
किया जाय उतने उपयोगी होते हैं।

विद्यावाचस्पति डॉ कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’
लखनऊ
स्वरचित/ मौलिक

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!