साहित्य

आदरणीय अटल बिहारी बाजपेयी

डाँ आदेश कुमार पंकज

 

अटल जी थे शब्दों के साधक, नीति के उजास ।
कवि हृदय में राष्ट्र बसता, विचारों का आकाश ।।

राजनीति में शुचिता का उन्होंने दीप जलाया ।
विरोध में भी संवाद का नव सेतु सदा बनाया ।।

भाषण उनके शांति सिखाते,दृढ़ता का मान ।
लोकतंत्र की मर्यादा थी रही अद्भुत पहचान ।।

पोखरण की ताकत से जग को सन्देश दिया ।
शांति की पहल से पड़ोसी को आमंत्रण दिया ।।

भारत को विश्व पटल पर ऊँचा स्थान मिला ।
संस्कृति और आधुनिकता का हर द्वार खुला ।।

कविताओं में पीड़ा, आशा, मानवता गूँजी ।
सरल जीवन में भी नेतृत्व की गरिमा सजी ।।

दल से ऊपर देश रखा,उसे मानते थे धर्म ।
मतभेदों में भी रहा सम्मान मान का कर्म ।।

युवाओं को सपनों की सद राह दिखलाई ।
विज्ञान, सड़क, संचार की नींव बनवाई ।।

वाणी में माधुर्य, निर्णय में बल ।
संकट में भी संयम रहा अटल ।।

स्मृतियों में आज भी है उनकी छाप अमिट ।
अटल जी भारत के गौरव,रहें युगों प्रतिष्ठित ।।

डाँ आदेश कुमार पंकज
विभागाध्यक्ष गणित शास्त्र
अवकाश प्राप्त
शाहजहाँपुर उ.प्र.

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