
अटल जी थे शब्दों के साधक, नीति के उजास ।
कवि हृदय में राष्ट्र बसता, विचारों का आकाश ।।
राजनीति में शुचिता का उन्होंने दीप जलाया ।
विरोध में भी संवाद का नव सेतु सदा बनाया ।।
भाषण उनके शांति सिखाते,दृढ़ता का मान ।
लोकतंत्र की मर्यादा थी रही अद्भुत पहचान ।।
पोखरण की ताकत से जग को सन्देश दिया ।
शांति की पहल से पड़ोसी को आमंत्रण दिया ।।
भारत को विश्व पटल पर ऊँचा स्थान मिला ।
संस्कृति और आधुनिकता का हर द्वार खुला ।।
कविताओं में पीड़ा, आशा, मानवता गूँजी ।
सरल जीवन में भी नेतृत्व की गरिमा सजी ।।
दल से ऊपर देश रखा,उसे मानते थे धर्म ।
मतभेदों में भी रहा सम्मान मान का कर्म ।।
युवाओं को सपनों की सद राह दिखलाई ।
विज्ञान, सड़क, संचार की नींव बनवाई ।।
वाणी में माधुर्य, निर्णय में बल ।
संकट में भी संयम रहा अटल ।।
स्मृतियों में आज भी है उनकी छाप अमिट ।
अटल जी भारत के गौरव,रहें युगों प्रतिष्ठित ।।
डाँ आदेश कुमार पंकज
विभागाध्यक्ष गणित शास्त्र
अवकाश प्राप्त
शाहजहाँपुर उ.प्र.




