
विद्या पाने की कोई,होती नहीं उमर।
शिक्षित होंगे सब अगर,नहीं करेंगे समर।।
दादी गाड़ी सीख रही,देखो अस्सी उमर।
हुनर होता पास तो,मन को मिलता सबर।।
के बी सी में बैठते,बालक छोटी उमर।
बड़े सभी यह देखते,मन में उठता गदर।।
शिक्षण नारी ले रही,देखे नहीं उमर।
राह पकड़ सबसे बड़ी,शिक्षा सही डगर।।
शिक्षा सबको बांँटना,देखो नहीं उमर।
छोटा बड़ा मत देखना,सबकी करो कदर।।
नीलम अग्रवाल “रत्न” बैंगलोर
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