साहित्य

शांति की देते पैगाम

उदय किशोर साह

 

वीर सपूतों की   पावन धरती को
करता हूँ मैं   बारंबार नित्य प्रणाम
जिसने दी है ये। तन मन की काया
लड़ लेगें लाखों ही    जगत संग्राम
गंगा यमुना   सरस्वती की ये  धारा
पवित्र पावन आमृत के    है समान
वन जंगल और ये हरी भरी उपवन
खुशियों का देता है पूरा   अरमान
उत्तर दिशा में  खड़ा       हिमालय
हर पल खड़ा है अपनी सीना तान
जिन मिट्टी का सागर पाँव    पखारे
वो मातृभुमि है हमारा   हिन्दुस्तान
सुभाष बुद्ध महावीर की ये धरती
सद्बुबुद्धि की देता जग को   ज्ञान
शिक्षा ग्रंथ ज्ञान विज्ञान की खजाना
से भरे थे कभी गुरूकूल था   धाम
शांति व सुकून की कण कण में है
विश्व शांति का छुपा एक    पैगाम
वसुधैव कुटुम्बकम है   हमारी नीति
मानवता की है हम सब की पहचान

उदय किशोर साह
मो० पो० जयपुर जिला बांका बिहार

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