आलेख

अधिवक्ता और डॉक्टर: मानवता की सेवा में ईश्वर का स्वरूप

अधिवक्ता कुमुद रंजन सिंह

पटना। समाज में कुछ पेशे ऐसे होते हैं, जिनका महत्व केवल रोजगार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वे सीधे मानव जीवन और उसके मूल अधिकारों से जुड़े होते हैं। पटना उच्च न्यायालय के अधिवक्ता अधिवक्ता कुमुद रंजन सिंह ने कहा कि अधिवक्ता और डॉक्टर दोनों ही मानवता की सेवा के ऐसे स्तंभ हैं, जिन्हें ईश्वर के मनुष्य रूप के तौर पर देखा जा सकता है।

उन्होंने कहा कि डॉक्टर जहां एक ओर बीमार और घायल व्यक्ति को नया जीवन देने का कार्य करता है, वहीं अधिवक्ता अन्याय से पीड़ित व्यक्ति को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष करता है। दोनों ही पेशे समाज में आशा और विश्वास के प्रतीक हैं। संकट की घड़ी में जब व्यक्ति स्वयं को असहाय महसूस करता है, तब डॉक्टर और अधिवक्ता ही उसके सबसे बड़े सहायक बनकर सामने आते हैं।

अधिवक्ता कुमुद रंजन सिंह ने बताया कि इन दोनों पेशों की मूल भावना सेवा, संवेदना और जिम्मेदारी है। एक डॉक्टर की सफलता मरीज के स्वस्थ होने में है, जबकि एक अधिवक्ता की सफलता न्याय की स्थापना में निहित है। यदि दोनों अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करें, तो समाज में विश्वास, सुरक्षा और संतुलन कायम रहता है।

उन्होंने आगे कहा कि एक स्वस्थ और न्यायपूर्ण समाज के निर्माण में डॉक्टर और अधिवक्ता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इनके योगदान को सम्मान देना और इनके प्रति विश्वास बनाए रखना समाज के हर नागरिक का दायित्व है। मानवता की सेवा के माध्यम से ये दोनों पेशे वास्तव में ईश्वर के कार्य को आगे बढ़ाने का काम करते हैं।

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