साहित्य

अनमोल रिश्ते

सुमन बिष्ट

रिश्ते हैं जीवन की धड़कनों का गीत,
जिनसे गुंजित है उम्मीद का संगीत।
अंधियारी रातों में जो थाम लें हाथ,
तब उजाला बन जाती है हर नाउम्मीद।

दुखों का बोझ जब मन पर हो भारी,
अपनों की हँसी लगती तब मन को प्यारी।
आँखों की नमी को जो समझ लें बिना कहे,
वही रिश्ते दिल में घर कर जाएँ सदा के लिए।

तनाव की आँधी जब चलती है तेज़,
प्यार ढाल बनकर उसे रखती सहेज।
दो बोल स्नेह के, दो पल का साथ,
बिखरे हुए मन को देते हैं एक नयी सौगात।

दिल की धड़कन भी पाए सुकून,
पास हों अपने, तो हर लम्हा गाता नयी धुन।
तन और मन भी हो जाता है रोशन
रिश्तों की गर्माहट से जब भर जाए दामन।

खुशियों की राह पर जब संग हों कदम,
तो थकान भी लगती है मीठा सा भ्रम।
यादों के रंगों से सजता है ये जीवन,
जैसे हर पल में खिला हो एक नया गुलशन ।

जो रिश्ते दें सुरक्षा का एहसास,
राह देखा दें , दे जीवन को साहस,
संबंधों का है ये संदेश अनमोल,
प्रेम और रिश्तों का नहीं कोई मोल।

सुमन बिष्ट, नोएडा

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