
ब्रज के कण-कण में रचा,बसा मधुर सलोना संसार।
राधे-मोहन पुण्य प्रेमात्मा द्वय,के एक दूजे से प्यार।।
पावन ब्रज की मोहिनी भू से,जन मन में प्रेम अपार।
मधुर प्रेम की सुगंध चतुर्दिक,बहती सुहावन बयार।।
राधा नाम लगे अति प्यारा,राधे राधे बोले जग सारा।
माँ यमुना की लहरें भी बोलें,राधे राधे जपे संसारा।।
योगेश्वर श्रीकृष्ण को केवल,राधा जू का नाम प्यारा।
राधा-गोपियों संग प्रेमातुर,कृष्णा रास रचाएँ सारा।।
ब्रज का रंगोत्सव फूलों की होली और फगुआ गान।
मथुरा गोकुल वृंदावन बरसाना,शोभित सब स्थान।।
लट्ठमार होली हो,कृष्ण-राधा का मयूर नृत्य है शान।
झाँझ मंजीरे ढ़ोल मृदंग,होलियारों के ये सुंदर गान।।
रत्न मुकुट माथे पर सोहे,उसमें मोर पंख यह प्यारा।
कदंब की डाल बैठे कान्हा,बंशी बजाते बड़ प्यारा।।
मुरली की मधुर धुन पर,गोप गोपियाँ नाचें हैं न्यारा।
लीलाधारी नटवर नागर,माखन चोर बड़ा है प्यारा।।
भक्ति भाव का प्रेम प्रदर्शन,विशेष प्रिय राधा-श्याम।
बोलें राधे श्याम बोलो राधे श्याम,बोलो राधे श्याम।।
ब्रज की माटी चंदन-सी,सम्पूर्ण ब्रज ही पावन धाम।
बोलें राधे श्याम बोलो राधे श्याम,बोलो राधे श्याम।।
ज्ञान विभूषण डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव
सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्रवक्ता-पी.बी.कालेज,प्रतापगढ़,उ.प्र.




