साहित्य

ग़ज़ल

डॉ ऋतु अग्रवाल

मौत का बन गया इश्तिहार आदमी
आदमी का हुआ है शिकार आदमी//

चंद नोटों की खातिर भुला सब दिया
चढ़ गया तुझ पे कैसा ख़ुमार आदमी//

हौंसला ख़ुद को दे बात बन जाएगी
किसका तुझको यहाँ इंतजार आदमी//

चाहिए गर नतीज़े तुझे नेक ही
ख़ुद पे शैतान मत कर सवार आदमी//

सोच कर काम कोई करेगा अगर
शोक का तू न होगा शिकार आदमी//

तू किसी की कहानी का पतझड़ न बन
तेरे हर ओर होगी बहार आदमी//

काम गर तू किसी के न आया कभी
कौन तेरी सुनेगा पुकार आदमी//

डॉ ऋतु अग्रवाल
मेरठ उत्तर प्रदेश

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