
दोस्तों के साथ जो पल बिताए थे।
ये बातें अब यादों में ही बस जाएँगे।।
आख़िर हम नहीं चाहते थे, वो दिन आ गया।
वर्षों की दोस्ती, आज आँसूओं में बदल गया।।
बिछड़ना तो किस्मत का एक खेल है।
ये सफर एक यादों की रेल है।।
जाने को कैसे कहूँ?
मिलने का वादा या अलविदा कहूँ।।
जाना तो पड़ेगा मेरे दोस्त, नई पीढ़ी तुम्हें याद करेगी।
फिर अब ना जाने, मुलाकात कहाँ होगी।।
तेरे साथ बिताए हर एक पल, मेरे लिए अनमोल है।
अलविदा कहना शायद, अब मेरे लिए मुश्किल है।।
रचनाकार- अनुराग बघेल, कक्षा 7 वीं, शास. पूर्व माध्य. शाला बिजराकापा खुर्द नवीन मुंगेली, छत्तीसगढ़




