
न्याय का दीप जले जग में,
हर मन में विश्वास रहे,
समानता की पावन धारा,
जीवन का आधार रहे।
न हो भेद कोई ऊँच-नीच का,
न रंग-रूप का तर्क हो,
हर मानव को मिले सम्मान,
न कोई अन्याय का कर्कश स्वर हो।
श्रमिक के श्रम का मूल्य मिले,
नारी को अधिकार मिले,
हर बच्चे को शिक्षा-दीपक,
सपनों का संसार मिले।
गरीब न रोए भूख से अब,
न आँसू व्यर्थ बहें,
सत्ता का हर निर्णय ऐसा,
जनहित की राह कहे।
जाति-धर्म की दीवारें सब,
प्रेम की आंधी तोड़े।
बंधुत्व की मधुर वीणा फिर,
हर दिल का सुर जोड़े।
विश्व बने परिवार हमारा,
मानवता पहचान बने,
न्याय, दया और करुणा से ही ,
जीवन का सम्मान बने।
आओ मिलकर शपथ उठाएँ,
अन्याय से संघर्ष करें,
सामाजिक न्याय की ज्योति से,
नवयुग का सृजन करें।
डाॅ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर, बिहार




