साहित्य

उम्रदराज

पूनम त्रिपाठी

70 के बाद का जीवन
बोझ नहीं, वरदान है
जिसे समाज अंत समझ लेता है,
वही उम्र सबसे गहरी समझ की पहचान है।
जहाँ इच्छाएँ शोर नहीं करतीं,
और अनुभव मौन में बोलते हैं,
जहाँ हर क्षण का मूल्य
समझ आता है,
रिश्तों का सच साफ़ दिखता है।
यह उम्र कमजोरी की नहीं,
संयम और संतुलन की होती है,
जहाँ जीवन को जीने की नहीं,
समझने की कला पूरी होती है।
70 के बाद का जीवन बोझ नहीं,
यह आत्मज्ञान की पहचान है,
जो इसे समझ ले, उसके लिए
यह उम्र सच में एक वरदान है।

पूनम त्रिपाठी
गोरखपुर ✍️

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also
Close
Back to top button
error: Content is protected !!