
होली तो हो ली मगर, उतरा नहीं खुमार ।
मुखमंडल बदरंग था, पर नैनों में प्यार ।।१।।
✍️
होली तो हो ली चलो, अब देखो घर-बार ।
सच्चा सुख इससे मिले, वह थी एक वयार ।।२।।
✍️
होली तो हो ली वहाँ, रखते सबसे प्रेम ।
वहीं जंग जारी जहाँ, नहीं दिलों में क्षेम ।।३।।
✍️
होली तो हो ली जरा, समझो तो संदेश ।
भस्म हुई जब होलिका, बदला तब परिवेश ।।४।।
✍️
होली तो हो ली चलो, लिक्खो अच्छे छंद ।
मानवता हो विश्व में, हिंसा बिल्कुल बंद ।।५।।
*-राम किशोर वर्मा*
जयपुर (राजस्थान)
दिनांक:- ०५-०३-२०२६ गुरुवार




