साहित्य

हिंदी दिवस

मधु वशिष्ठ

हिंदी दिवस का शुभ दिन आया,
गर्वित होकर मन मुस्काया।
हिंदी में ही लिखें और बात करें,
हम अब यही बात है शान की।

कहीं कभी भी हिंदी में बात करना,
अब नहीं बात अपमान की।
हम हिंदी भाषी लोगों ने हिंदी को कमतर तोला था,
हालांकि पहला शब्द हमने हिंदी में ही बोला था।

हिंदी में ही मां की लोरी ने,
हमारे कानों में अमृत घोला था।
लेकिन कॉन्वेंट स्कूल से पढ़ने के बाद,
अंग्रेजी को महिमा मंडित करके गर्व से अंग्रेजी को ही बोला था।

हिंदी से मुख था जो मोड़ा,
मानो पुरातन से नाता तोड़ा।
लेकिन आज समय वह आया है,
जब अपनी संस्कृति पर गर्व हमें हो आया है।

हिंदी में ही देकर सरकारी परीक्षा,
आईएएस अफसर भी आया है।
हमारे ही संस्कार और संस्कृति को,
आज विदेशियों ने भी अपनाया है।

रामायण, महाभारत, वेद, पुराण,
इन पुस्तकों से लेकर ज्ञान,
आज हमारे भारत ने विश्व गुरु बनने की ओर कदम बढ़ाया है।
चंद्रमा तक भी हमारी पहुंच हो गई,
हिंदी भाषा का परचम लहराया।

रामायण गीता का भाव सबको भाया,
हिंदी ने सब पर कुछ ऐसा रंग चढ़ाया,
मानो हम सबको खुद से ही मिलवाया।
हिंदी हमें अपनी जड़ों से जोड़ती है,
आपसी प्रेम और भाईचारे की ओर मोड़ती है।

मधु वशिष्ठ फरीदाबाद हरियाणा

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